भिलाई। प्रबुद्ध परिषद छत्तीसगढ़ द्वारा आईआईटी भिलाई में ‘भारत बोध 2025’ विषय पर दो दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें देशभर के ओजस्वी वक्ता, विद्वान एवं शिक्षाविद शामिल हुए। कुल आठ सत्रों में संपन्न इस संगोष्ठी में भारतीय परंपरा, न्याय, शिक्षा, शोध, साहित्य और अर्थशास्त्र पर गहन चर्चा हुई।
उद्घाटन सत्र में ऑर्गेनाइजर के संपादक प्रफुल्ल केतकर, आईआईटी निदेशक राजीव प्रकाश, प्रांत संघ संचालक टोपलाल वर्मा और प्रबुद्ध परिषद के प्रांत संयोजक अतुल नागले मंचासीन रहे। केतकर ने शोध और बोध के अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि विदेशी आक्रमणों ने कई सभ्यताओं को मिटा दिया, लेकिन भारत की सांस्कृतिक विरासत आज भी जीवित है।
दूसरे सत्र में विचारक सदानंद दामोदर सप्रे ने भारतीय परंपरा में नारी के स्थान पर प्रकाश डाला। वहीं चौधरी चरण सिंह विवि के प्रोफेसर डॉ. संजीव शर्मा ने न्याय व शासन की भारतीय दृष्टि विषय पर सारगर्भित व्याख्यान दिया। चौथे सत्र में जेएनयू के प्रो. हीरामन तिवारी ने आधुनिक शिक्षा और भारत विषय पर विचार व्यक्त किए।
दूसरे दिन गोरखपुर विश्व विद्यालय के प्रो. कौस्तुभ नारायण मिश्र ने शोध और अनुसंधान की भारतीय दृष्टि पर उदाहरणों के साथ अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि हम अपनी क्षमताओं को कम आंकते हैं, जबकि विश्व भारत की ओर देख रहा है।
छठवें सत्र में आईआईटी निदेशक राजीव प्रकाश ने कहा कि धर्म, भाषा और राजनीति के नाम पर भारत को तोड़ने की कोशिशें होंगी, इसलिए हमें सावधान रहना होगा। सातवें सत्र में छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी अध्यक्ष शशांक शर्मा ने समकालीन साहित्य में भारत बोध विषय पर अपने विचार रखे। अंतिम सत्र में लेखक और भारतीय आर्थिक-सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक कनक सभापति ने अर्थशास्त्र में स्व की अभिव्यक्ति विषय पर व्याख्यान दिया।
संगोष्ठी में सत्राध्यक्ष के रूप में डॉक्टर सच्चिदानंद शुक्ला, जॉर्ज कुरियन, प्रो. मिलिंद दांडेकर, डॉ. गिरीश चंदेल, डॉ. एडीएन बाजपेई, डॉ. एनवी रमन्ना, वर्णिका शर्मा और अनीता वाजपेई सहित कई विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम में हेमचंद विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. संजय तिवारी, सुंदरलाल शर्मा विश्वविद्यालय के कुलपति वीरेंद्र सारस्वत, उच्च शिक्षा संचालक राजेश पांडेय, साइंस कॉलेज दुर्ग के प्राचार्य अजय सिंह, साहित्यकार विनोद मिश्र, स्वरूपानंद महाविद्यालय की प्राचार्य हंसा शुक्ल सहित अनेक प्राध्यापक, साहित्यकार और छात्र उपस्थित रहे।
सत्रों का संचालन डॉ. विकास पंचाक्षरी, ज्योति धारकर, रचना नायडू, डॉ. नवनीत कौर, डॉ. अनुज नारद, डॉ. अभिषेक त्रिपाठी, आदित्य तामस्कर, अदिश गिरी और प्रणति ने किया। संगोष्ठी में प्रश्नोत्तर सत्र भी रखा गया, जिसमें प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया।

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